नयी दिल्ली, 20 मार्च। देश भर के 25 से अधिक विधि विद्यालयों के 44 से अधिक छात्र संगठनों ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक 2026 की निंदा की। उन्होंने दावा किया कि यह ”ट्रांसजेंडर, इंटरसेक्स और जेंडरक्वीर व्यक्तियों की गरिमा, स्वायत्तता और संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करता है।”
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार द्वारा 13 मार्च को लोकसभा में पेश इस विधेयक का उद्देश्य ”ट्रांसजेंडर” शब्द की सटीक परिभाषा देना है। यह प्रस्तावित कानून के दायरे से ”विभिन्न यौन अभिरूचि और स्वयं-निर्धारित लैंगिक पहचान” को बाहर रखने का भी प्रावधान करता है। नलसार क्वीर कलेक्टिव, गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई के संबंधित छात्र, लॉयड लॉ कॉलेज के संबंधित छात्र, एमएनएलयू क्वीयर सपोर्ट ग्रुप, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (विधि संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय), फेमिनिस्ट एलायंस एनएलएसआईयू, एनएलएसआईयू में ह्यूमन राइट्स कलेक्टिव और जामिया क्वीर कलेक्टिव (जामिया मिलिया इस्लामिया) सहित अन्य छात्र संगठनों ने संयुक्त बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि प्रस्तावित संशोधन “स्वयं की पहचान, बदलाव और चुने हुई पारिवारिक ढांचों के लिए खतरा है।”