नई दिल्ली, 20 मार्च। अर्धसैनिक बलों मसलन बीएसएफ,सीआईएसएफ, सीआरपीएफ, आइटीबीपी, एसएसबी के पूर्व वरिष्ठ पदाधिकारियों ने नई दिल्ली में कहा कि सरकार की ओर से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक को लाकर सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने का यत्न करने जा रही है।
प्रस्तावित विधेयक को संसद में पेशी से पहले सार्वजनिक बहस के लिए आम जनता के बीच लाने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है तो राष्ट्रीय सुरक्षा और अर्धसैनिक बलों का मनोबल दोनों को खतरा है। विधेयक के अनुसार, 50 फीसद आईजी और 20 फीसद डीआईजी पद आईपीएस के लिए आरक्षित होंगे।
प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करने वालों में एस के सूद (पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक बीएसएफ),
एचआर सिंह (पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक सीआरपीएफ), विकास चंद्र (पूर्व महानिरीक्षक बीएसएफ), एसके चौधरी (पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक आईटीबीपी), पीके गुप्ता (पूर्व महानिदेशक एसएसबी), केके शर्मा (पूर्व महानिरीक्षक सीआरपीएफ ) सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल थे। उन्होंने कहा- ‘सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में ‘सीएपीएफ’ (बीएसएफ,सीआईएसएफ, सीआरपीएफ, आइटीबीपी, एसएसबी) के अपने कैडर अधिकारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनमें आईपीएस की तैनाती को चरणबद्ध तरीके से कम करने और कैडर अधिकारियों को पदोन्नति देने का आदेश दिया है।सरकार प्रस्तावित विधेयक के माध्यम से सरकार आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को कानूनन वैध और स्थायी बनाने का प्रयास कर रही है, जिसका काडर में विरोध हैं।’