नई दिल्ली, 4 अप्रैल। भारत में यदि 1688 अति-धनी परिवारों पर ‘संपत्ति कर’ लगा दिया जाए तो कल्याणकारी योजनाओं के लिए 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि जुटाई जा सकती है।
दिल्ली में जारी वेल्थ ट्रैकर इंडिया 2026 रपट में यह दावा किया गया है। रपट में भारत में बढ़ती आर्थिक असमानता के बारे में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। जहां एक ओर 5 सबसे अमीर परिवारों की संपत्ति 2019 से 2025 के बीच 400 फीसद बढ़ी, वहीं निचले 50 फीसद आबादी की संपत्ति हिस्सेदारी 2024 तक केवल 6.4 फीसद पर स्थिर बनी हुई है। यह रपट, जिसे सेंटर फार फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी और टैक्स द टाप अभियान द्वारा प्रकाशित किया गया है, बताती है कि भारत में असमानता का स्तर बहुत ज्यादा हो गया है। रपट के हवाले से सेंटर फार फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी के अनिर्बान भट्टाचार्य ने कहा कि 1,688 अति-अमीर परिवारों (1000 करोड़ से अधिक संपत्ति वाले) पर 2 फीसद –6 फीसद का प्रगतिशील संपत्ति टैक्स और एक-तिहाई विरासत टैक्स लगाने से हर साल 10.63 लाख करोड़ की राशि जुटाई जा सकती है। इस राशि का उपयोग लोगों के कल्याण के लिए किया जा सकता है।
टैक्स द टाप अभियान के राज शेखर का कहना है कि समय की मांग है कि इन अति-अमीर लोगों पर संपत्ति टैक्स लगाया जाए, जिससे सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करने और लोकतंत्र को खतरे में डाल रही असमानता को दूर करने के लिए संसाधन जुटाए जा सकें।
रपट बताती है कि मुकेश अंबानी, गौतम अडानी व परिवार, सावित्री जिंदल व परिवार, सुनील मित्तल व परिवार और शिव नाडर की संयुक्त संपत्ति 2019 से 2025 के बीच 400 फीसद बढ़ी। जबकि अंबानी की संपत्ति 2019 से 2025 के बीच 153 फीसद बढ़ी, जबकि अडानी की संपत्ति में 625फीसद की भारी वृद्धि हुई।