देहरादून 08 फरवरी। उत्तराखण्ड के विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने राज्य में महिलाओं के विरुद्ध बढ़ती हिंसा और साम्प्रदायिक घटनाओं पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। प्रदेश की वर्तमान कानून-व्यवस्था नागरिकों, विशेषकर महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने में अक्षम साबित हो रही है। संगठनों ने एक स्वर में मांग की है कि अपराधिक तत्वों पर कठोर कार्रवाई की जाए और न्याय प्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए। विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। संगठनों का आरोप है कि मामले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों को बुलडोजर कार्रवाई के जरिए नष्ट करने का प्रयास किया गया और उस प्रभावशाली ‘वीआईपी’ की पहचान को अब तक उजागर नहीं किया गया है, जिसकी वजह से यह घटना घटित हुई।
निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने के लिए यह मांग दोहराई गई है कि पूरे मामले की सीबीआई जांच उच्चतम न्यायालय की देखरेख में संपन्न कराई जाए। इसके साथ ही गुंजन श्रीवास्तव और प्रीति रावत के हत्यारों को भी जल्द से जल्द कड़ी सजा देने की मांग की गई है। इस साझा वक्तव्य के माध्यम से यह सूचित किया गया है।
संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि महिला सुरक्षा और न्याय प्रक्रिया की अनियमितताओं पर तत्काल सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में राज्यव्यापी बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। यह बयान प्रदेश की न्याय व्यवस्था में सुधार और महिलाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के प्रति संकल्प को प्रदर्शित करता है। इस अवसर पर मुख्यरूप से सीपीआईएम के अनन्त आकाश, सीटू के लेखराज, जनवादी महिला समिति के इंदु नौडियाल, भीम आर्मी के आज़म खान, एसएफआई के कनिका, उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद के नवनीत गुसाईं, नेताजी संघर्ष समिति के प्रभात डण्डरियाल, यूकेडी की प्रमिला रावत, समाजसेवी दीप्ति रावत, आरयूपी के बालेश बबानिया आदि उपस्थित थे।