नई दिल्ली: देश की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आम बजट पेश करते समय भारत के किसान और कृषि क्षेत्र को पूरी तरह से भुलाकर राम भरोसे छोड़ दिया है। यह उपेक्षा, निराशाजनक से आगे बढ़कर अनदेखी करने वाला बजट साबित होगा।
कृषि को केवल उत्पादकता बढ़ाने के भरोसे छोड़ दिया है। इसका अर्थ है कि किसान का कल्याण केवल उत्पादकता के भरोसे है। उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि के अनुकुल मौसम, पानी, मिट्टी, बीज, खाद, कीटनाशक की जरूरत होती है। इनसे अगर कोई चीज की उपलब्धता कम हो तो उत्पादकता गिर सकती है ।
किसान की आय उत्पादन बढ़ाने से नहीं बल्कि फसलों के उचित मूल्य मिलने से बढ़ती है।
आर्थिक सर्वेक्षण में कृषि के लिए जो चिंताएं थी उनके समाधान का कोई रास्ता नहीं है। पिछले वर्षों में की है घोषणाओं का कोई लेखा जोखा बजट में नहीं बताया है। कृषि में कोई बड़े बदलाव का संकेत नहीं है, भारत की कृषि अब राम भरोसे है। सरकार ने इसे पूरी तरह राम के भरोसे रख दिया है