नई दिल्ली, 29 जनवरी। दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल आफ ओपन लर्निंग (एसओएल) व कैंपस आफ ओपन लर्निंग (सीओएल) के तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन मेंं दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि ओपन, डिस्टेंस और डिजिटल लर्निंग की चुनौतियों पर बोले सूद, कहा-मानव-केंद्रित, समावेशी और नैतिक डिजिटल शिक्षा व्यवस्था के निर्माण जरूरी है। सम्मेलन का उद्घाटन गुरुवार को हुआ। यह 31 जनवरी तक चलेगा।
समारोह की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने की। शिक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की विशाल युवा जनसंख्या को ऑनलाइन, दूरस्थ, डिजिटल एवं मिश्रित अधिगम के माध्यमों से उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना समावेशी राष्ट्रीय विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप शिक्षा का सशक्तिकरण, नवाचार, उद्यमिता और सामाजिक गतिशीलता का प्रमुख आधार बताया, जिससे युवा नागरिक राष्ट्र के निर्माण में सार्थक योगदान दे सकें। दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने अपने अध्यक्षीय भाषण में दूरस्थ शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की अग्रणी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन नीति संवाद, शैक्षणिक आदान-प्रदान और डिजिटल एवं मिश्रित अधिगम में वैश्विक श्रेष्ठ अनुभवों के साझा करने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। मुक्त शिक्षा परिसर की निदेशक प्रो. पायल मागो और मुक्त शिक्षा विद्यालय के प्राचार्य प्रो अजय जैसवाल ने मुक्त और दूरस्थ शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन में नवाचार, गुणवत्ता सुनिश्चितता, शिक्षार्थी सहायता प्रणालियों तथा शिक्षकों की क्षमता निर्माण के महत्व पर बल दिया।