नई दिल्ली, 26 जनवरी: कर्तव्य पथ पर 77वें गणतंत्र दिवस परेड समारोह में नई पहल के तहत कई कदम उठाए गए थे।
दर्शक दीर्घाओं को चिह्नित करने के लिए ‘वीवीआइपी’ और अन्य ऐसे लेबल का इस्तेमाल नहीं किया गया था। इसके बजाय, इन्हें भारत में बहने वाली नदियों के नाम गंगा, यमुना, कृष्णा, नर्मदा, पेरियार, सिंधु, झेलम, कावेरी, कोसी आदि पर रखे गए थे।
पहली बार भैरव बटालियन, सूर्यास्त्र समेत कई साजो-सामान का प्रदर्शन किया गया। नवगठित भैरव लाइट कमांडो बटालियन और शक्तिबाण रेजिमेंट, सटीक मारक क्षमताओं से लैस राकेट लान्चर सिस्टम ‘सूर्यास्त्र’ और स्वदेशी युद्धक सामग्री सहित कई प्रमुख सैन्य साजो-सामान कर्तव्य पथ पर 77वें गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार प्रदर्शित किए गए।
पहली बार दो कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंट और जांस्कर टट्टू भी इस समारोह का हिस्सा बने, जिससे दर्शकों के बीच जिज्ञासा और उत्साह का माहौल बन गया। इसके अलावा, पहली बार परेड के दौरान घुड़सवार 61वीं कैवलरी के सदस्य लड़ाकू वर्दी में दिखाई दिए।
परेड में पहली बार शक्तिबाण रेजिमेंट का भी प्रदर्शन हुआ, जिसे सेना के तोपखाने की ताकत बढ़ाने के लिए स्थापित किया गया है। नई रेजिमेंट में ड्रोन, ‘काउंटर-ड्रोन’ और लोइटर म्यूनीशन की व्यवस्था होगी।