विद्यार्थियों ने किए वक्ताओं से सवाल, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन, बुक स्टालों पर जुटी भीड़
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के पहले साहित्य महोत्सव “दिल्ली यूनिवर्सिटी लिटरेचर फेस्टिवल” (डीयूएलएफ़) का शुभारंभ गुरुवार, 12 फरवरी को विश्वविद्यालय के मल्टी पर्प्ज स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हुआ।
फेस्टिवल के उद्घाटन अवसर पर डीयूएलएफ़ के पैट्रन इन चीफ़ डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे।
इस अवसर पर कुलपति ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य सोचना, समझना और बोलना सिखाता है। साहित्य व्यक्ति को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ मिट्टी से जोड़ने का भी काम करता है। उद्घाटन समारोह के पश्चात अनेक वक्ताओं के चर्चा सत्र हुए और विद्यार्थियों ने वक्ताओं से सवाल भी पूछे।
खुले मैदान में लगे अनेकों प्रकाशकों के बुक स्टालों पर जहां भारी भीड़ रही तो वहीं रग्बी स्टेडियम में डीयू कल्चर काउंसिल के ओर से सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों का खूब मन मोहा।
कुलपति ने साहित्य महोत्सव के ध्येय वाक्य “राष्ट्र प्रथम-एकता में अनेकता” पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज भारत आगे बढ़ रहा है। हमारे प्रधानमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत का संकल्प लिया है, ऐसे में भारत की एकता को भी मजबूत करने की जरूरत है। शहीद भगत सिंह की जेल डायरी का उदाहरण देते हुए कुलपति ने बताया कि वह फांसी से पहले तक भी किताबें पढ़ते थे और लेख लिखते थे, इससे विद्यार्थियों को प्रेरणा लेनी चाहिए।