नई दिल्ली, 15 जनवरी। दिल्ली विश्वविद्यालय की यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली फ़ाउंडेशन द्वारा समर्पण समारोह 2026 का आयोजन गुरुवार को किया गया। इस अवसर पर सशक्त बेटी प्रोजेक्ट का दूसरा चरण भी लॉन्च किया गया। डीयू के वाइस रीगल लॉज के कन्वेंशन हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह मुख्य अतिथि और बीएसईएस के ग्रुप सीईओ एवं निदेशक अमल सिन्हा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान सशक्त बेटी प्रोजेक्ट की 524 लाभार्थियों को लैपटॉप वितरित किए गए। इस अवसर पर डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने इस योगदान के लिए बीएसईएस का आभार जताते हुए कहा कि समर्पण का भाव उत्तरदायित्व की भावना लाता है। अमल सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा में आज की प्रौद्योगिकी की जरूरत को ध्यान में रखते हुए ही लैपटॉप देने का निर्णय लिया गया।
प्रो. योगेश सिंह ने अपने संबोधन में बीएसईएस का उदाहरण देते हुए कहा कि देश की हर पब्लिक सैक्टर अंडरटेकिंग और कंपनियों को सोचना चाहिए कि यदि निवेश करना है तो शैक्षणिक संस्थानों और शिक्षा में किए गए निवेश जैसा कोई निवेश नहीं हो सकता। हमारे घर में जो बच्चे हैं वो तो हमारे हैं ही, लेकिन समाज जो बच्चे स्कूलों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने के लिए देता है, ये सब भी तो हमारे ही तो बच्चे हैं। इनके भविष्य की चिंता करना, इनके लिए सुविधाओं की चिंता करना; इसमें सरकार का सहयोग तो होता ही है, लेकिन अब भारत में समाज का सहयोग भी मिलने लगा है। कुलपति ने कहा कि आजादी से पहले तो भारत में यह परंपरा थी, लेकिन आजादी के बाद धीरे-धीरे कम होती चली गई। अब उसके पुन:स्थापना का समय आया है। उन्होंने कहा कि यह शाश्वत सत्य है कि आप किसी के साथ अच्छा करेंगे तो आपके साथ भी अच्छा ही होगा। प्रो. योगेश सिंह ने शिक्षकों और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि एनईपी में स्नातक का जो चौथा साल आया है, यह अगले 5 वर्षों में कॉलेजों के इको सिस्टम को बदलेगा। यह हमारे बच्चों के हित में है। उन्होंने कहा कि ये समाज प्राध्यापकों से भी समर्पण की भावना रखता है। प्राध्यापक भी बच्चों को सही दिशा दिखाएँ।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि बीएसईएस के ग्रुप सीईओ एवं निदेशक अमल सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा में आज की जरूरत को ध्यान में रखते हुए ही लैपटॉप देने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि वह डीयू के पूर्व विद्यार्थी हैं, और डीयू के लिए किसी भी तरह योगदान देना उनका सौभाग्य है। अमल सिन्हा ने कहा कि हमारे बहुत से प्रोजेक्ट चलते रहते हैं। डीयू के साथ इस प्रोजेक्ट को आगे भी जारी रखा जाएगा। कार्यक्रम के आरंभ में यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली फ़ाउंडेशन के सीईओ प्रो. अनिल कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य सशक्त बेटी प्रोजेक्ट के तहत योग्य छात्राओं को लैपटॉप वितरित करना है, जिससे डिजिटल शिक्षण उपकरणों तक उनकी पहुंच मजबूत हो सके। उन संस्थागत और कॉर्पोरेट भागीदारों के सहयोग को स्वीकार करना और उनकी सराहना करना जिन्होंने इस पहल को संभव बनाया है। कार्यक्रम के समापन पर डीयू रजिस्ट्रार डॉ विकास गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने संबोधन में यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली फ़ाउंडेशन की स्थापना मे महत्व और इसकी उपयोगिता की भी जानकारी दी। इस अवसर पर डीन ऑफ कॉलेजेज प्रो. बलराम पाणी, दक्षिणी परिसर की निदेशक प्रो. रजनी अब्बी, एसओएल की निदेशक प्रो. पायल मागो, डीयू रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता और डीयू फ़ाउंडेशन के सीईओ प्रो. अनिल कुमार सहित विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र, विभिन्न संस्थानों के प्रमुख, विभिन्न संकायों के डीन, अनेकों शिक्षक और परियोजना के लाभार्थी उपस्थित रहे।
2.35 करोड़ रुपए से दिये बीएसईएस ने लैपटाप
यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली फ़ाउंडेशन द्वारा बीएसईएस के सहयोग से “समर्पण समारोह 2026” में 2.35 करोड़ रुपए की लागत से 524 लाभार्थी छात्राओं को लैपटाप वितरित किए गए। ये सभी लैपटाप बीएसईएस ने उपलब्ध करवाए। इन लाभार्थियों में अनाथ छात्राएं, सिंगल-पैरेंट परिवारों की छात्राएं (जिनकी सालाना घरेलू आय 4 लाख रुपये से कम है) और दिल्ली विश्वविद्यालय के फैकल्टी, डिपार्टमेंट, सेंटर और कॉलेजों की दृष्टिबाधित छात्राएं शामिल हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली फ़ाउंडेशन के सीईओ प्रो. अनिल कुमार ने कहा कि यह पहल युवा महिलाओं को सशक्त बनाने और डिजिटल लर्निंग तक उनकी पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है। विदित रहे कि गत वर्ष दिल्ली विश्वविद्यालय फाउंडेशन द्वारा अपने प्रथम ‘समर्पण समारोह’ का आयोजन चार जनवरी को किया गया था। उस समय 2.25 करोड़ रुपए की लागत से लैपटाप और टेबलेट वितरित किए गए थे। तब मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा था कि डीयू आज यह आयोजन बीज रूप में है, लेकिन एक दिन यह वट वृक्ष बनेगा।