सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने मार्च 2005 में विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों से जुड़े मुद्दों की जांच के लिए रेनके आयोग (विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के लिए राष्ट्रीय आयोग) का गठन किया था। आयोग ने जुलाई 2008 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
केंद्र सरकार ने आयोग की सिफारिशों पर विचार करने के बाद तीन वर्ष की अवधि के लिए विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनसीडीएनटी) का गठन किया। एनसीडीएनटी की अनुशंसा पर फरवरी 2019 में विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के विकास और कल्याण के लिए एक विशेष बोर्ड का गठन हुआ।
इन समुदायों के कल्याण और आर्थिक उत्थान को ध्यान में रखते हुए, वर्ष 2022 में “विमुक्त, घुमंतू समुदायों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण की योजना” (एसईईडी) आरंभ की गई। इस योजना के लिए वित्तीय अवधि 2021-22 से 2025-26 तक निर्धारित की गई है, जिसके तहत कुल 200.00 करोड़ रुए का परिव्यय स्वीकृत किया गया है।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।