प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज भारतीय परंपरा के कालजयी ज्ञान का उल्लेख करते हुए राष्ट्र-निर्माण में सतत् प्रयास और दृढ़ता के महत्व पर बल दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रयास के अभाव में जो हासिल किया हुआ है, वह भी नष्ट हो सकता है और भविष्य के अवसर हाथ से निकल सकते हैं, जबकि निरंतर प्रयास के माध्यम से ही वांछित परिणाम प्राप्त होते हैं और समृद्धि सुनिश्चित होती है।
श्री मोदी ने एक्स पर यह संस्कृत श्लोक उद्धृत करते हुए कहा:
“अनुत्थाने ध्रुवो नाशः प्राप्तस्यानागतस्य च।
प्राप्यते फलमुत्थानाल्लभते चार्थसम्पदम्॥