नई दिल्ली , 1 अप्रैल । मेडिकल प्रवेश प्रणाली के लिए ‘एक राष्ट्र, एक काउंसलिंग’ की मांग की गई। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद एकल परीक्षा के रूप में एनईईटी (नीट) को अपनाए जाने के बाद बुधवार को इसकी लड़ाई लड़ रहे लोगों ने मेडिकल प्रवेश में ‘एक राष्ट्र, एक काउंसलिंग’ की मांग की।
इसे लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को सामूहिक ज्ञापन सैंपा गया। सांसदों से मुलाकात कर उन्हें इसे लेकर उनसे समर्थन की मांग की गई। इसकी अगुवाई दक्षिण भारत के रहने वाले वीएआरके. प्रसाद ने की। उन्होंने संवाददाताओं से कहा-‘ 2011-12 में एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद ‘एकल परीक्षा’ के रूप में एनईईटी को अपनाया गया था ताकि पारदर्शिता आए।
वर्तमान में छात्रों को एनईईटी रैंक मिलने के बाद विभिन्न राज्यों और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी के माध्यम से अलग-अलग आवेदन करना पड़ता है। काउंसलिंग शेड्यूल में टकराव के कारण छात्र अक्सर एक सीट छोड़कर दूसरी जगह चले जाते हैं, जिससे अंततः कई महत्वपूर्ण सीटें खाली रह जाती हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए 7000 से अधिक पीजी मेडिकल सीटें अब भी खाली पड़ी हैं। सोसाइटी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से आग्रह किया है कि इन सीटों को भरने के लिए ‘शून्य पर्सेंटाइल’ तक पात्रता में ढील दी जाए और मेडिकल कॉलेजों को नाममात्र शुल्क पर सीधे प्रवेश की अनुमति दी जाए ताकि डॉक्टरों की कमी को दूर किया जा सके।