प्रयागराज, 15 जनवरी। माघ मेले के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन की नई शाखा परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, प्रयागराज से कहा गया की स्वामी चिदानन्द सरस्वती के नेतृत्व एवं साध्वी भगवती सरस्वती के मार्गदर्शन में परमार्थ निकेतन सेवा, साधना और समाज कल्याण को जीवन का संकल्प बनाकर निरंतर कार्यरत है। स्वामी जी ने कहा की “प्रकाश केवल दीपक में नहीं, विचारों में भी जलना चाहिए। जीवन उत्सव के साथ उद्देश्य से जुड़कर ही सार्थक बनता है।
” परमार्थ निकेतन वर्षों से अध्यात्म, सेवा और वैश्विक संवाद के माध्यम से समानता, सद्भावना और शाश्वत शांति का संदेश दे रहा है। इंटरफेथ डायलॉग, विश्व शांति संवाद और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में इसकी भूमिका आज विश्वभर में प्रेरणा बन चुकी है। इसी प्रेरणा से स्थापित परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, प्रयागराज आज सेवा, शिक्षा और सशक्तिकरण की नई त्रिवेणी के रूप में कार्य कर रहा है। माघ मेला स्नान तट से लेकर गंगा आरती, विद्यालयों और समाज के हर वर्ग तक पर्यावरण जागरूकता, जल संरक्षण, नारी सशक्तिकरण, स्वच्छता तथा वैदिक–वैज्ञानिक कार्यशालाओं के माध्यम से सेवा का संदेश पहुँचाया जा रहा है। स्वामी जी ने कहा की “आज ऐसे केंद्रों की आवश्यकता है जहाँ वेद और विज्ञान, शिक्षा और संस्कार, सनातन और शांति एक साथ विकसित हों।” परमार्थ त्रिवेणी पुष्प में चारों धामों के प्रतिरूप, अनेक मंदिर, अमर जवान ज्योति, भारत माता मंदिर एवं चारों वेदों की स्थापना ने देवभक्ति के साथ देशभक्ति का अमर संदेश दिया है। यह स्थान आज राष्ट्र चेतना का तीर्थ बन चुका है।
गुरुकुल की स्थापना के माध्यम से वैदिक शिक्षा का पुनर्जागरण यह संदेश देता है कि विकास का अर्थ अपने मूल्यों से विमुख होना नहीं, बल्कि उन्हें और ऊँचाई देना है। आज जब संसार भौतिक प्रगति में आगे है, पर मानसिक और आध्यात्मिक थकान से जूझ रहा है, तब परमार्थ त्रिवेणी पुष्प एक ऊर्जा-केंद्र, चिंतन-धारा और आत्मिक प्रेरणा बनकर उभर रहा है।