नई दिल्ली: उच्च न्यायालय ने लापता व्यक्तियों की संख्या कथित तौर पर बढ़ने के मामले में बुधवार (11 फरवरी) को केंद्र सरकार और अन्य को जबाव तलब किया।
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने केंद्र के अलावा राष्ट्रीय राजधानी सरकार और दिल्ली पुलिस से अपना पक्ष रखने को कहा है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने उस जनहित याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश में लापता व्यक्तियों की संख्या में ”वृद्धि” पर चिंता व्यक्त की गई है।
पीठ ने पूछा कि क्या इसी तरह की कोई याचिका उच्चतम न्यायालय में लंबित है।
एनजीओ ‘फ्रीडम रिक्लेम्ड’ द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि दिल्ली में एक ”अभूतपूर्व संकट” है, क्योंकि 2026 के पहले 15 दिनों में 800 से अधिक लोगों के लापता होने की खबरें हैं।
वकील अभिषेक तिवारी के जरिये दायर याचिका में इस बात पर प्रकाश डाला है कि एक पखवाड़े में 800 लोगों के लापता होने की भयावह दर अपराध, मानव तस्करी और अन्य गंभीर संगठित आपराधिक गतिविधियों के फलते-फूलते तंत्र की ओर इशारा करती है।
‘याचिका में कहा गया कि दिल्ली पुलिस की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016 और 15 जनवरी 2026 के बीच दिल्ली में लापता हुए व्यक्तियों की कुल संख्या 2,32,737 है, जिनमें से 52,326 व्यक्तियों के बारे में आज तक कोई सुराग नहीं है।
उच्च न्यायालय इस मामले में अगली सुनवाई 18 फरवरी को करेगी।