नई दिल्ली, 24 जनवरी: विश्व स्तरीय डेटा गोपनीयता दिवस (28 जनवरी) डिजिटल रूप से निर्भर दुनिया के लिए व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा जरूरी है।
45 से अधिक देशों में वहां की सरकारें, संगठनों, शिक्षकों और व्यक्तियों को डेटा गोपनीयता और जिम्मेदार डिजिटल सूचनाओं की गोपनियता को बढ़ावा देने के लिए एक साथ आए है।
भारत में, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून (डीपीडीपी कानून) के लागू होने और इसके अंतिम नियमों के जारी होने के बाद डेटा गोपनीयता दिवस का महत्व और भी बढ़ गया है।
यह कानून स्पष्ट अपेक्षाएं स्थापित करता है कि डिजिटल व्यक्तिगत डेटा को हर हाल में गोपनीयता रखा जाना चाहिए।
विशेषज्ञों की माने तो डेटा गोपनीयता इसलिए मायने रखती है क्योंकि हर डेटा बिंदु के पीछे एक वास्तविक व्यक्ति होता है। जब व्यक्तिगत डेटा का दुरुपयोग किया जाता है या उसे उजागर किया जाता है, तो इसका प्रभाव सिस्टम से कहीं अधिक दूर तक जाता है, जिससे विश्वास, सुरक्षा और व्यक्तिगत भलाई प्रभावित होती है।
ऐसी दुनिया में जहां डिजिटल पदचिह्न तेजी से स्थायी होते जा रहे हैं, गोपनीयता में विफलताएं केवल तकनीकी चूक नहीं हैं, बल्कि किसी व्यक्ति की पहचान, प्रतिष्ठा और सुरक्षा के लिए वास्तविक खतरा हैं।