नई दिल्ली, 2 अप्रैल। सोशल मीडिया मंचों पर सरकार की बढ़ी निगरानी और नए कानूनी प्रावधानों के बीच गुरुवार को सांसदों व डिजिटल मिडिया में कार्यरत लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लोकतंत्र की बुनियादी शर्तों का उल्लंघन करार दिया।
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद मनोज झा और संजय सिंह समेत मोलिटिक्स के संपादक नीरज झा, वरिष्ठ पत्रकार पंकज श्रीवास्तव, कई व्यंग्यकार आदि शामिल थे।
राज्य सभा सांसद संजय सिंह ने अपने वक्तव्य में तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह की कार्रवाई ‘चिंताजनक प्रवृत्ति’ को दर्शाती है।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है, तो फिर आलोचनात्मक कंटेंट को हटाने की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा-‘ सरकार ने आइटी कानून में जो बदलावों को प्रस्तावित किया है, जिसका उद्देश्य न्यूज क्रिएटर्स को भी कानूनी दायरे में लाना है।
इससे सरकार को कंटेंट रेगुलेशन पर प्रत्यक्ष नियंत्रण मिल सकता है। राज्यसभा सांसद मनोज झा ने अपने वक्तव्य में इस मुद्दे को व्यापक लोकतांत्रिक संदर्भ में रखते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि असहमति और आलोचना के लिए जगह संकुचित होती है, तो लोकतांत्रिक विमर्श कमजोर होता है। इस बाबत बुलाई प्रेस कांफ्रेस में उन्होंने कंटेंट हटाने की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी और उसके लोकतांत्रिक प्रभावों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।