नई दिल्ली: तेइस मार्च से जेनेवा में शुरु होने जा रहे वैश्विक सम्मेलन (पीएबीएस वार्ता) के ठीक पहले तीस से ज्यादा गैर-सरकारी संगठनों व स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिख कर वैक्सीन और दवाई बनाने के वैश्विक कंपनियों के एकाधिकार को रोकने की अपील की।
- 23 मार्च से जेनेवा में शुरु होने जा रहे वैश्विक सम्मेलन (पीएबीएस वार्ता) के ठीक पहले तीस से ज्यादा गैर-सरकारी संगठनों व स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय मंत्री को भेजा ज्ञापन
- स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य मंत्री से कहा, वैक्सीन और दवा की वैश्विक कंपनियों के एकाधिकार को रोकना जरूरी
स्वास्थ्य मंत्री को भेजे गए ज्ञापन में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर वैक्सीन और दवा की विदेशी कंपनियों और यूरोपीय देशों के कथित एजेंडे के खिलाफ सुरक्षा, जवाबदेही, पारदर्शिता सुनिश्चित कराने की अपील की गई है।
स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को भेजे ज्ञापन में उन्होंने कहा-‘ हम, नीचे हस्ताक्षरित संगठन और व्यक्ति, महामारी समझौते के तहत पीएबीएस अनुबंध पर जिनेवा में डब्ल्यूएचओ द्वारा की जा रही वार्ता के संबंध में गहरी चिंता व्यक्त करते हैं। चिंताजनक बात यह है कि विकसित देश, विशेषकर यूरोपीय संघ और नार्वे, अब प्रभावी लाभ साझाकरण तंत्रों के साथ-साथ रोगजनकों और उनकी डिजिटल अनुक्रम सूचना (डीएसआई) की जवाबदेही, पारदर्शिता और पता लगाने की क्षमता के लिए आवश्यक प्रावधानों का विरोध कर रहे हैं। लिहाजा जरूरी है कि भारत, जवाबदेही और संप्रभु अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जैविक सामग्री और अनुक्रम जानकारी दोनों के लिए मजबूत ट्रैकिंग और ट्रेसिंग तंत्र स्थापित करें।’
नई दिल्ली में इसकी जानकारी देते हुए डाक्टर वी सैम ने कहा-‘ कोरोना महामारी से बहुत सीख लेने की जरूरत है। महामारी को रोकने वाले वैक्सीन और दवाएं तभी सभी विकासशील व गरीब देशों के लिए सुलभ हो सकेंगी जब डब्ल्यूएचओ के समझौते में इसे बनाने वाली कंपनियां व देश पर मनमाना न कर सकने के प्रावधानों को उनमें शामिल किए जाएं।’