नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी “डिजिटल समाज और मानवीय मूल्य: एआई युग में एकात्म मानव दर्शन का पुनरुद्धार’ में केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि एआई के दौर में ‘विरासत’ और ‘विकास’ का संतुलन अनिवार्य है।
उन्होंने -‘भारत की सभ्यतागत विकास तथा सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक तकनीक के बीच समन्वय स्थापित करने का आह्वान किया । 800 से अधिक शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों की उपस्थिति में भारत ने ‘कृत्रिम बौधिकता’ के क्षेत्र में नैतिक मानकों को तय करने वाले वैश्विक मार्गदर्शक के रूप में अपनी भूमिका स्पष्ट की।
समापन सत्र में प्रो हेम चंद जैन, (प्राचार्य, दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज) दिल्ली विश्वविद्यालय ने कार्यशाला की रिपोर्ट प्रस्तुत की और कार्यक्रम का संचालन प्रो. शैलेश मिश्रा ने किया।