नई दिल्ली, 22 फरवरी। यूनेस्को के ‘वैश्विक शिक्षा निगरानी’ (जीईएम) दल ने बताया कि कक्षाओं में ध्यान केंद्रित करने में कमी और ऑनलाइन माध्यम से धमकाए जाने (साइबरबुलिंग) के मामलों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आधे से अधिक देशों ने स्कूलों में फोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। दल ने पाया कि सोशल मीडिया के उपयोग से खान-पान संबंधी विकार से पीड़ित होने की संभावना लड़कों की तुलना में लड़कियों में दोगुना होती है। फेसबुक के एक शोध के अनुसार, इंस्टाग्राम के उपयोग के बाद 32 फीसद किशोरियों में अपने शरीर को लेकर असंतोष की भावना बढ़ गई। रिपोर्ट में टिकटॉक के ‘एल्गोरिदम’ को लेकर चिंताजनक रुझानों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि यह किशोरों को हर 39 सेकंड में ‘शारीरिक छवि’ से जुड़ी साम्रागी दिखाता है और हर आठ मिनट में खान-पान से जुड़े विकारों से संबंधित सामग्री दिखाता है। जीईएम के एक वरिष्ठ सदस्य ने संवाददाताओं को बताया कि 2025 के अंत से कई देशों ने स्कूलों में मोबाइल फोन पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध लागू किया है, जिससे इस प्रवृत्ति में लगातार बढ़ोतरी हुई है। हाल के समय में बोलीविया, कोस्टा रिका, क्रोएशिया, जॉर्जिया, मालदीव और माल्टा जैसे देश इस सूची में शामिल हुए हैं। फ्रांस उन देशों में शामिल है जहां इस मुद्दे पर बहस अब भी जारी है। यहां स्कूलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर शुरुआती और व्यापक रूप से उद्धृत प्रतिबंधों में से एक लागू किया गया था, जिसके तहत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं में फोन के उपयोग पर रोक है। रिपोर्ट के अनुसार कोमोरोस, कोलंबिया, एस्टोनिया, लिथुआनिया, आइसलैंड, पेरू, इंडोनेशिया, सर्बिया, पोलैंड और फिलीपींस ऐसे देशों में शामिल हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, पुर्तगाल और स्पेन जैसे देश शामिल हैं, जबकि डेनमार्क, चेक गणराज्य और इंडोनेशिया में इस मुद्दे पर चर्चा जारी है।